अग्निवेश अग्रवाल का निधन: कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर समझना जरूरी
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कार्डियक अरेस्ट दिल की इलेक्ट्रिकल फेल्योर स्थिति है, जिसमें तुरंत सीपीआर और डिफिब्रिलेशन जीवनरक्षक साबित होते हैं।
अग्निवेश अग्रवाल के निधन ने कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के अंतर को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
Health/ वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल के असामयिक निधन ने एक बार फिर कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को लेकर लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका में इलाज के दौरान महज 49 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन होना न केवल उद्योग जगत बल्कि आम लोगों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। अक्सर इन दोनों स्थितियों को एक ही मान लिया जाता है, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से दोनों बिल्कुल अलग हैं और इनके प्रभाव व उपचार भी अलग-अलग होते हैं।
कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?
कार्डियक अरेस्ट दिल की एक गंभीर और अचानक होने वाली स्थिति है, जिसमें दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि अचानक बंद हो जाती है। दिल में मौजूद नेचुरल पेसमेकर जब सही तरीके से इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजना बंद कर देता है, तो दिल की धड़कन रुक जाती है। ऐसे में व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो सकता है, सांस रुक सकती है और नाड़ी महसूस नहीं होती। यही कारण है कि इसे सडन कार्डियक अरेस्ट कहा जाता है और तुरंत इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर
हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल को खून पहुंचाने वाली कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज हो जाता है। इससे दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, लेकिन दिल धड़कता रहता है और मरीज आमतौर पर होश में होता है।
इसके विपरीत, कार्डियक अरेस्ट में दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाला इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल हो जाता है, जिससे दिल पूरी तरह रुक जाता है। इस स्थिति में तत्काल सीपीआर और डिफिब्रिलेशन न मिले तो जान बचना बेहद मुश्किल हो जाता है।
कार्डियक अरेस्ट के कारण
डॉक्टरों के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट हमेशा पहले से दिल की बीमारी के कारण ही नहीं होता। कई मामलों में यह अचानक भी आ सकता है। इसके प्रमुख कारणों में वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन जैसी गंभीर एरिथमिया, दिल की मांसपेशियों की बीमारी, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, गंभीर ब्लॉकेज और ऑक्सीजन की कमी शामिल हैं।
इलाज के दौरान खतरा क्यों बढ़ता है?
किसी दुर्घटना, सर्जरी या गंभीर इलाज के बाद शरीर पहले से कमजोर होता है। खून की कमी, ऑक्सीजन लेवल का गिरना, अत्यधिक मानसिक तनाव और छाती पर चोट दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि अस्पताल में इलाज के दौरान भी कार्डियक अरेस्ट का खतरा बना रहता है।
कार्डियक अरेस्ट के लक्षण
कार्डियक अरेस्ट के लक्षण अचानक सामने आते हैं, जैसे तेज चक्कर या बेहोशी, सांस लेने में कठिनाई, दिल की धड़कन का असामान्य हो जाना, सीने में तेज दर्द और अत्यधिक कमजोरी। इन संकेतों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।
अग्निवेश अग्रवाल का निधन इस बात की याद दिलाता है कि दिल से जुड़ी बीमारियों को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। समय पर पहचान, सही जानकारी और त्वरित चिकित्सा ही जीवन बचा सकती है।